जानिए कितनी सुरक्षित है भारत में बनी मारुति अर्टिगा

संशोधित: अक्टूबर 31, 2019 07:12 pm | सोनू | मारुति अर्टिगा 2015-2022

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ग्लोबल न्यू कार असिसमेंट प्रोग्राम (ग्लोबल एनसीएपी) ने सेफकार्सफोरइंडिया कैंपेन के तहत भारत में बनी चार कारों पर क्रैश टेस्ट किया है, इस में एक मारुति अर्टिगा भी शामिल है। ग्लोबल एनसीएपी के क्रैश टेस्ट में मारुति अर्टिगा को व्यस्क व चाइल्ड पैसेंजर की सुरक्षा के लिए 3-स्टार रेटिंग मिली है। 

यह क्रैश टेस्ट अर्टिगा के बेस वेरिएंट एलएक्सआई पर हुआ है, इस में ड्यूल एयरबैग, एबीएस, रियर पार्किंग सेंसर, सीटबेल्ट रिमाइंडर, आईएसओफिक्स चाइल्ड सीट एंकर, स्पीड सेंसिटिव डोर लॉक, फ्रंट सीटबेल्ट प्रीटेंशनर और लोड लिमिटर जैसे फीचर दिए गए हैं। 

ग्लोबल एनसीएपी के अनुसार क्रैश टेस्ट में कार का बॉडी स्ट्रक्चर अस्थिर रहा और पेडल पोजिशन से ड्राइवर के पैर को नुकसान पहुंचने की संभावनाएं सामने आई। पैसेंजर के सिर, गर्दन और चेस्ट प्रोटेक्शन के मामले में यह कार बेहतर साबित हुई। हालांकि क्रैश टेस्ट में अर्टिगा के पैसेंजर सीटबेल्ट प्रीटेंशनर ने अच्छे से काम नहीं किया। इसके अलावा ड्राइवर की चेस्ट पर भी नुकसान पहुंचने की संभावनाएं बनी रही। 

क्रैश टेस्ट के दौरान कार में 18 महीने के बच्चे की डमी को रखा गया। कार में आईएसओफिक्स चाइल्ड सीट एंकर होने के बावजूद भी इसके नतीजे खराब रहे। अर्टिगा की सेकेंड रो में बीच वाले पैसेंजर के लिए थ्री-पॉइंट सीटबेल्ट का अभाव भी खला। 

ग्लोबल एनसीएपी का क्रैश टेस्ट 64 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड पर किया जाता है। यह क्रैश टेस्ट एक निश्चित रफ्तार पर होता है, ऐसे में तेज रफ्तार में यह कार पैसेंजर के लिए सुरक्षित रहेगी या नहीं, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।

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