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रेनो ट्राइबर एएमटी लॉन्ग टर्म रिव्यू

Published On नवंबर 20, 2020 By cardekho for रेनॉल्ट ट्राइबर

पिछले कुछ महीने काफी उतार चढ़ाव वाले रहे। एक तो लॉकडाउन और दूसरा घर से काम करना, साथ ही इस दौरान हेल्थ को लेकर भी अस्पतालों के कई चक्कर लगाने पड़े। ऐसे में ऑटोमोबाइल के प्रति मेरा नजरिया भी पूरी तरह बदल गया। इससे पहले मुझे कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ था कि मेरे पास एक कार हो। गनीमत ये रही कि मेरे पास रेनो ट्राइबर एएमटी लॉन्ग टर्म टेस्ट रिव्यू करने के लिए मौजूद थी जो मेरे वाकई काफी काम आई। 

बड़ी खासियतों वाली छोटी कार

मुझे हमेशा से ही सब-4 मीटर सेगमेंट वाली ट्राइबर एमपीवी एक छोटी कार लगती थी। मगर जब मैनें इसे पहली बार अपने पार्किंग लॉट में पार्क किया तो मेरा ये भ्रम भी दूर हो गया। जो लोग इस 7-सीटर का पूरा उपयोग लेना चाहते हैं वो इसके साइज़ की काफी तारीफ करेंगे। मगर, अक्सर कार में मैं या तो अकेला होता था या फिर साथ में एक को पैसेंजर। 

रेनो ट्राइबर में थर्ड रो की सीटों को पूरी तरह फोल्ड करना पड़ता है। मगर इनके साथ समस्या ये है कि इनके पाए थोड़े ऊंचे हैं जिससे सामान रखने में थोड़ी परेशानी आती है। 

क्या ये है एक परफेक्ट फैमिली कार?

यदि ट्राइबर में केवल पांच पैसेंजर ही बैठें तो ये काफी शानदार साबित होती है। इसकी सेकंड रो में अच्छा खासा स्पेस दिया गया है। कंंफर्ट के लिए सीटबैक में रिक्लाइन का फंक्शन भी मौजूद है और बी पिलर पर एसी वेंट्स भी दिए गए हैं। फ्रंट में भी जगह की कोई कमी नहीं है, मगर अच्छी खासी कद काठी वाले ड्राइवर को ये छोटी लग सकती है। 

मुझे इसकी सबसे अच्छी बात स्टोरेज स्पेस की लगी। हर डोर पॉकेट में आप एक दो बॉटल आराम से रख सकते हैं, वहीं सेंटर कंसोल पर दो कप होल्डर्स भी दिए गए हैं जहां बड़ी बॉटल और हैंड सेनिटाइजर जैसे आइटम रखे जा सकते हैं। कपहोल्डर्स के पीछे कूल्ड बॉक्स भी दिया गया है जहां 1 लीटर तक की बॉटल रखी जा सकती है। इसके अलावा स्टार्ट बटन के पास एक ट्रे भी दी गई है, जहां आराम से एक फोन रखा जा सकता है। वहीं दो फ्रंट एयरबैग के साथ पैसेंजर साइड पर दो ग्लव बॉक्स भी दिए गए हैं। 

स्पेस के मोर्चे पर तो रेनो ट्राइबर काफी अच्छी है, मगर ड्राइविंग एक्सपीरियंस के मोर्चे पर हमें ये उतनी खास नहीं लगी। सिटी में इसके 1.0 लीटर इंजन का आउटपुट काफी अच्छा लगता है। सिटी में इसका एएमटी गियरबॉक्स काफी अच्छे से काम करता है और क्विड से थोड़ा बेहतर ट्यून्ड है। आराम से चलाने पर गियर शिफ्ट्स काफी स्मूद रहते हैं। 

हम इसे काफी बार हाईवे पर भी लेकर गए, मगर वहां इसका परफॉर्मेंस उतना सही नहीं लगा। 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से ऊपर ले जाने पर इसके इंजन से उतनी पावर नहीं मिलती है। यदि आप थोड़ा जल्दी ओवरटेक करना चाहें तो इसके लिए गियरबॉक्स से आउटपुट वैसा नहीं मिलेगा जैसा मिलना चाहिए। 3000 आरपीएम के बाद इसका इंजन शोर मचाने लग जाता है। 

ट्राइबर का एएमटी वर्जन उतना फ्यूल एफिशिएंट नहीं है। चूंकि हमने ज्यादातर इसे भारी ट्रैफिक में चलाया और इससे हमें 10.5 किलोमीटर प्रति लीटर का ही माइलेज प्राप्त हुआ। 

ट्राइबर में पैडल्स का प्लेसमेंट सिस्टम मुझे अजीब लगा। आमतौर पर मैनुअल के मुकाबले एएमटी में ब्रेक पैडल बड़ा होता है। मगर कंपनी ने पैसा बचाने के लिए ट्राइबर के एएमटी वर्जन में मैनुअल वाले एक्सलरेटर और ब्रेक पैडल लगा दिए। ना केवल सिर्फ इसके ब्रेक पैडल छोटे लगते हैं बल्कि ये एक्सलरेटर पैडल के काफी पास पोजिशन किए गए हैं। ऐसे में जल्दी जल्दी एक पैडल से दूसरा पैडल इस्तेमाल करने में काफी अजीब सा लगता है। 

मुझे इसकी की-लेस एंट्री काफी पसंद आई। इसने काफी हद तक लग्जरी कारों जैसा अहसास कराया। केवल आपको फ्लैट की के साथ कार के पास जाना होता है और डोर्स अपने आप अनलॉक हो जाते हैं। गाड़ी को पार्क करते ही उससे थोड़ा दूर चले जाने पर दरवाजे अपने आप बंद हो जाते हैं। ये काफी अच्छा हैंड्स फ्री फीचर है और मुझे काफी आश्चर्य होता है कि ये हर कार में क्यों मौजूद नहीं है। 

सिटी में चलाने के लिए ट्राइबर काफी अच्छी गाड़ी है। इसमें ज्यादा स्पेस, प्रेक्टिकैलिटी और एएमटी गियरबॉक्स का कंफर्ट मिलता है। हाईवे पर मैने इसे ज्यादा नहीं चलाया है और जितना चलाया वहां मुझे इससे कुछ खास परफॉर्मेंस नहीं मिली। इसके लिए मैं अगली बार इससे एक लंबी दूरी तय करूंगा और आखिरी निष्कर्ष फिर उसी के बाद निकलेगा।

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