इन 7 पॉइंट में समझें पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने से ग्राहकों को होने वाले फायदे और नुकसान

प्रकाशित: जून 11, 2021 03:22 pm । सोनू

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भारत सरकार ने पर्यावरण को सुरक्षित रखने और फ्यूल की कीमत कम करने के लिए पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की योजना बनाई है। इथेनॉल को गन्ने से तैयार किया जाता है और इसे पेट्रोल में मिलाकर फ्यूल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इथेनॉल वातारण को सुरक्षित रखने में मदद करता है और साथ ही इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।

वर्तमान में फ्यूल कंपनियां पेट्रोल में 5 से 10 प्रतिशत तक इथेनॉल का मिला रही है। सरकार ने 2022 तक सभी कारें 10 प्रतिशत इथेनॉल मिले फ्यूल और 2025 तक 20 प्रतिशत इथेनॉल मिले फ्यूल के अनुरूप तैयार करने की योजना बनाई है।

पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाकर बेचने के सरकार के इस फैसले का असर उपभोक्ताओं पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से पड़ेगा, जिसे हम 7 पॉइंट में समझेंगेः-

1 गाड़ी का माइलेज हो जाएगा कम

सरकारी की रिपोर्ट के अनुसार यदि आपकी गाड़ी 0 प्रतिशत इथेनॉल मिले मानकों के अनुरूप है और उसमें 10 प्रतिशत इथेनॉल मिला पेट्रोल डाला जाता है तो कार का माइलेज 6-7 प्रतिशत घट जाता है। इसी प्रकार यदि आपकी गाड़ी 10 प्रतिशत ब्लैंड के अनुरूप और और उसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल मिला पेट्रोल डालेंगे तो माइलेज 1-2 प्रतिशत घट सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलावट के अनुरूप तैयार इंजन भी थोड़े कम माइलेज दे सकते हैं। 

2. इंजन को ज्यादा इथेनॉल मिलाने के अनुरूप करना पड़ेगा मॉडिफाई

इसके लिए इंजन में कुछ बदलाव करने होंगे जिनमें हार्डवेरयर और ट्यूनिंग भी शामिल है ताकि माइलेज घटने को कम किया जा सके। यह काम मैन्यूफैक्चरर की साइड से किया जाएगा और उन्हें ही ये सुनिश्चित करना होगा उनकी कारों में ये जरूरी बदलाव हों। साथ ही कंपनियों को यह सुनिश्चित करने की भी जरूरत है कि उनकी गाड़ियों की इंजन ट्यूनिंग (स्पार्क टाइमिंग) और इंजन कंप्रेशन रेश्यो भी सही है।

3. कम उत्सर्जन

इथेनॉल मिलने के बाद ऑक्टेन नंबर और फ्लेम स्पीड बढ़ जाती है जिससे फ्यूल की पूरी खपत होती है और गाड़ी हाइड्रोकार्बन और कार्बन मॉनोक्साइड जैसे उत्सर्जन कम करेगी। इससे पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।

4. गाड़ी को स्टार्ट करने और ड्राइव में नहीं आएगी कोई परेशानी

सरकार ने जो टेस्ट किए हैं उनके अनुसार 20 प्रतिशत इथेनॉल मिले पेट्रोल वाली गाड़ी को स्टार्ट करने और ड्राइव करने में फिट पाया गया है। टेस्ट में किसी भी चरण में खराबी या रूकावट नहीं आई। हालांकि यह सब इंजन में बदलाव करने के बाद ही संभव हुआ था।

5. पेट्रोल और डीजल से सस्ता हो सकता है इथेनॉल फ्यूल

इथेनॉल भारत में ही तैयार होता है और इसके आयात में कोई भी कोई परेशानी नहीं है। इसके अलावा सरकार इस फ्यूल को प्रमोट करने के लिए टैक्स में भी कुछ छूट देने की योजना बना रही है। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की तुलना में इथेनॉल फ्यूल सस्ता हो सकता है।

6. गाड़ियों की प्राइस में हो सकती है बढ़ोतरी

गाड़ियों के इंजन को 20 प्रतिशत ब्लैंड इथेनॉल फ्यूल के अनुरूप मोडिफाइ करने से उनकी कीमत में 3,000 से 5,000 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

7. पुरानी गाड़ियों का क्या होगा ?

पुराने वाहनों को 20 प्रतिशत ब्लैंड इथेनॉल फ्यूल के हिसाब से अपडेट कराना पड़ेगा। इसके लिए ग्राहकों को अपनी गाड़ियों के इंजन और पार्ट्स में कई बदलाव कराने की जरूरत पड़ेगी जो उनके लिए महंगा सौदा साबित हो सकता है। सरकार ने कंपनियों से मौजूदा गाड़ियों को 10 प्रतिशत इथेनॉल मिले पेट्रोल के अनुरूप तैयार करने को कहा है जबकि नई गाड़ियां 20 प्रतिशत इथेनॉल फ्यूल को सपोर्ट करेगी।

ब्राजील केस स्टडी

ब्राजील में इस समय सबसे ज्यादा इथेनॉल फ्यूल का इस्तेमाल होता है। ब्राजील में 18 से 27.5 प्रतिशत इथेनॉल मिला पेट्रोल बिकता है। ब्राजील फ्लेक्स फ्यूल इंजन टेक्नोलॉजी का भी समर्थन करता है जिसमें 85 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल मिलाया जाता है। 2019 में ब्राजील में 80 प्रतिशत से ज्यादा गाड़ियां फ्लेक्स फ्यूल सपोर्ट करने लगी थी।

फ्लेक्स फ्यूल इंजन टेक्नोलॉजी के अनुरूप गाड़ियों को तैयार करने के लिए उनमें बहुत ज्यादा अपडेट करने की जरूरत पड़ती है। इससे गाड़ी खरीदना और उसकों मेंटेन करना महंगा होगा जो हमारे देश के हिसाब से सही नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार इस टेक्नोलॉजी से भारत में कारों की प्राइस 17,000 से 25,000 रुपये तक बढ़ सकती है।

इन सब बातों को समझने के बाद यह पता चलता है कि ज्यादा इथेनॉल मिलने से पर्यावरण को तो कम नुकसान होगा लेकिन यह आपकी जेब का खर्च बढ़ जाएगा।

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