स्कोडा रैपिड 1.0 लीटर टीएसआई ऑटोमैटिक : फर्स्ट ड्राइव रिव्यू

Published On दिसंबर 09, 2020 By भानु for न्यू स्कोडा रैपिड

प्रीमियम सेडान सेगमेंट में स्कोडा रैपिड एक शानदार और ड्राइवर फोकस्ड कार रही है। इसके कुछ मुख्य कारण इसकी सॉलिड क्वालिटी, अच्छे पावरट्रेन और ड्राइविंग डायनामिक्स है। इसके 2020 मॉडल में केवल पावरट्रेन में बदलाव हुए हैं। इसमें अब 1.6 लीटर डीएसजी कॉम्बिनेशन की जगह ज्यादा बेहतर 1.0 लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल ऑटोमैटिक कॉम्बिनेशन दिया गया है। अपग्रेडेशन के चलते ये कार 56,000 रुपये महंगी हो गई है।

हमने इससे पहले नए टर्बोचार्ज्ड इंजन से लैस मोंटे कार्लो वेरिएंट को चलाकर देखा था जिसने हमें काफी प्रभावित किया था। यहां आप स्कोडा रैपिड 1.0 टीएसआई का फर्स्ट ड्राइव रिव्यू पढ़ सकते हैं। इस बार हमने इसके साथ ऑटोमैटिक गियरबॉक्स को परखा है। क्या ये डीएसजी की कैटेगरी जितना अच्छा है? जानेंगे आगे:-

इंजन और परफॉर्मेंस

हमें इसका 1.0 लीटर टर्बोचार्ज्ड मैनुअल वर्जन तो चलाकर देखने के बाद काफी पसंद आया था। अब जब हमने इसके 1.0 लीटर टर्बोचार्ज्ड ऑटोमैटिक वर्जन को चलाकर देखा तो ये इंजन हमें इस कैटेगरी के इंजनों में से सबसे ज्यादा रिफाइंड लगा। ये 110 पीएस की पावर और 175 एनएम का टॉर्क जनरेट करने में सक्षम है। न्यूट्रल पर रहने के दौरान इसमें एक हल्की सी वाइब्रेशन होती है, मगर एसी ऑन करने के बाद इस वाइब्रेशन का पता ही नहीं चलता है। ये दूसरे 3 सिलेंडर इंजन की तरह आवाज नहीं करता है और ये काफी पंची है। ये 2000 आरपीएम के करीब पावर देना शुरू कर देता है। 6000 आरपीएम तक ये इंजन गाड़ी को मोमेंटम देने लग जाता है। हालांकि स्टीन ड्राइविंग के दौरान लोअर आरपीएम पर ​टर्बो किक्स आने से पहले तक ये पावर देने में थोड़ा समय लगाता है। 

ऑटोमैटिक गियरबॉक्स

मिड रेंज में स्कोडा रैपिड का इंजन काफी पावरफुल साबित होता है और इस गियरबॉक्स कॉम्बिनेशन के साथ तो ये और भी बेहतर हो जाता है। हालांकि ये आपके कार चलाने के पैटर्न पर भी काफी निर्भर करता है, या तो आपको ड्राइविंग पसंद आएगा ​या फिर ये आपको बिल्कुल भी पसंद नहीं आएगा। 

यदि आप स्पोर्टी ड्राइविंग के कुछ ज्यादा ही शौकीन है और स्पीड लिमिट के आसपास ही गाड़ी चलाते हैं तो आपको ये इंजन काफी पसंद आएगा। इसमें कम टर्बो आपके ड्राइविंग एक्सपीरियंस को खराब कर देगा, वहीं ट्रांसमिशन हाई रेव्स को होल्ड करके रखेगा। इसका मतलब ये हुआ कि गियर बदलने की तब जरूरत महसूस होगी जब अगला गियर टर्बो की रेंज में आ जाएगा। इससे आपको एक क्लीयर और फास्ट एक्सलरेशन मिलेगा, भले ही आप कितनी भी देर पैडल पर अपना पांव रखे। यदि आप गियर ज्यादा जल्दबाजी में डाउन होने की जरूरत महसूस करते हैं तो केबिन में ये चीज महसूस की जाएगी लेकिन ये तुरंत डाउन होता है। चाहे गियर अप होने की बात हो या फिर डाउन होने की, इसके गियर शिफ्ट्स काफी तेज हैं और ट्रांसमिशन आपके थ्रॉटल रिस्पॉन्स और स्पीड बदलने के अनुसार रिस्पॉन्ड करता है। इस मामले में तो ये डीएसजी गियरबॉक्स से भी ज्यादा अच्छा साबित होता है। यदि आप जल्दी से भी गियर डाउन होने की जरूरत महसूस करें तो भी ये  ऑटोमैटिक गियरबॉक्स कंफ्यूज नहीं होता है।

रैपिड में स्पोर्ट मोड भी दिया गया है जो लो थ्रॉटल सिचुएशन में भी 3500 आरपीएम तक रेव्स को होल्ड करके रखता है। इसका मतलब ये हुआ कि भारी ट्रैफिक में क्रूज करते हुए आप नोटिस करेंगे कि इसका इंजन काफी मेहनत कर रहा है। इसी समय आप गियर डाउन होते समय थोड़ा जर्क भी महसूस करेंगे। स्पोर्ट मोड पर चलाने की जरूरत तब महसूस होती है जब रोड खुली खुली हो और तभी आप इस इंजन की सही पावर को महसूस कर पाएंगे। स्कोडा रैपिड 1.0 लीटर टर्बोचार्ज्ड  ऑटोमैटिक वर्जन को 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल करने में 10.7 सेकंड का समय लगता है। इसकी एक्सलरेशन पावर सेगमेंट में काफी अच्छी है। बता दें कि इसके मुकाबले में मौजूद हुंडई वरना 1.0 टर्बो पेट्रोल डीसीटी को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल करने में 12.3 सेकंड का समय लगता है। वहीं होंडा सिटी को इसी काम के लिए 12.74 सेकंड लगते हैं। हाईवे पर चलाने के लिहाज से तो रैपिड काफी शानदार सेडान कार है जो 17.30 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज दे देती है।

यदि आप अक्सर अपनी फैमिली को बैठाकर कार ड्राइव करते हैं तो शायद आपको स्कोडा का ये पावरट्रेन कॉम्बिनेशन पसंद ना आए। पावर मेंटेन करने के लिए इसका ऑटोमैटिक गियरबॉक्स रेव्स को होल्ड करके रखता है, ऐसे में ट्रैफिक में भी रैपिड काफी फुर्तिली साबित होती है। इसी कारण 20 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर स्कोडा ओवरटेकिंग के लिए 6.59 सेकंड्स का ही समय लगाती है। इस मामले में ये वरना डीसीटी (7.78 सेकंड्स) और होंडा सिटी सीवीटी (7.25 सेकंड्स) से ज्यादा तेज है। सिटी में वरना का ये वेरिएंट 13.67 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देता है। 

रूटीन ड्राइविंग में कुछ और फेक्टर्स भी हैं जो इंजन से मेहनत करवाते हैं। एक्सलरेट करते ही ये शुरूआत में काफी तेजी से आगे की ओर जाती है जिससे आपको एकबारगी तो ब्रेक लगाना ही पड़ता है। रेव्स पिक करते हुए जब कभी कोई स्पीड ब्रेकर या सिग्नल आ जाए तो गाड़ी स्लो करने पर थोड़ा सा लैग महसूस होता है। इसके बाद जब गाड़ी में फिर से पावर आती है तो स्पीड मेंटेन नहीं हो पाती है। इसके अलावा रैपिड रेव्स होल्ड करके रखती है और धीमी भी नहीं पड़ती है, फिर भले ही आप किसी धीरे चल रही कार के पीछे ही क्यों ना चल रहे हों। नतीजतन आपको ब्रेक्स लगाने ही पड़ते हैं। 

ऐसे में फिर ये बात महसूस होती है कि डीएसजी गियरबॉक्स ज्यादा अच्छे रहते हैं। सिटी में रैपिड का ये वर्जन ज्यादा फास्ट महसूस होता है। ऐसे में स्पोर्टी ड्राइविंग करने वालों को तो ये काफी पसंद आएगा। 

चलिए स्कोडा रैपिड 1.0 लीटर टर्बोचार्ज्ड ऑटोमैटिक की खूबियों और खामियों पर डालते हैं एक नजर:

खूबियां

1. हैंडलिंग और कंफटेबल बैलेंसिंग: स्कोडा रैपिड अपने सेगमेंट की सबसे अच्छी हेंडलिंग वाली कार है। इसके स्टीयरिंग का वजन काफी बैलेंस्ड है जिससे आपमें गाड़ी को हैंडल करने का कॉन्फिडेंस बना रहता है। इसकी ग्रिप और सस्पेंशन बैलेंस आपको अच्छी स्पीड मेंटेन करने में मदद करते हैं और बॉडी रोल भी कंट्रोल में रहता है। ये गड्ढों या स्पीड ब्रेकर्स के ऊपर से आराम से गुजर जाती है। नई रैपिड में अब अपडेटेड सस्पेंशन दे दिए गए हैं जो पैसेंजर्स को गड्ढों या स्पीड ब्रेकर्स के आने पर बेहतर कुशनिंग देते हैं। हालांकि इसके सस्पेंशंस से आने वाली आवाज केबिन के अंदर तक सुनाई देती है। 

2. रियर सीट स्पेस: स्कोडा रैपिड की रियर सीट्स काफी अच्छी और स्पेशियस है। इसका सीट बेस काफी लंबा और चौड़ा है जिससे पैसेंजर्स को अच्छा खासा अंडरथाई सपोर्ट मिलता है। लंबी यात्राओं में आपको सीटो में रिक्लाइन फंक्शन होने से कोई तकलीफ भी नहीं होती है। इसमें तीन लोग आराम से बैठ सकते हैं, मगर बीच में बैठने वाले को बड़े ट्रांसमिशन टनल से कुछ दिक्कतें हो सकती है। 

3. बूट स्पेस: स्कोडा रैपिड में 460 लीटर का बूट स्पेस मिलता है। इसमें आप फैमिली ट्रिप के लिहाज से अच्छा खासा सामान रख सकते हैं। 

कमियां

1. इंफोटेनमेंट: इसमें दिया गया 8 इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट दिखने में काफी आकर्षक लगता है। इसकी डिस्प्ले काफी वाइब्रेंट है और वीडियो क्वालिटी भी अच्छी है। मगर इसे देखकर ऐसा लगता है कि कंपनी ने इसे मार्केट से खरीदकर सीधा ही इस गाड़ी में लगा दिया हो। ये अपने ही एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम से चलता है और एपल कारप्ले और एंड्रॉयड ऑटो कनेक्टिविटी को सपोर्ट नहीं करता है। इसमें नेविगेशन और ब्राउजिंग का फीचर इनबिल्ट ही है जिसके लिए इंटरनेट की जरूरत पड़ती है और इसके लिए आपको अपने स्मार्टफोन की जरूरत रहती है। कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी के चलन को देखते हुए ऐसे फीचर्स काफी आउटडेटेड लगते हैं। इसमें कॉन्टेक्ट्स को सिंक करना भी काफी मुश्किल भरा रहा। नतीजतन इनकमिंग कॉल्स आने पर डिस्प्ले में केवल नंबर शो हुए ना कि कॉल करने वाले का नाम। इसके उलट रैपिड के निचले वेरिएंट्स में ​दी गई 6.5 इंच स्क्रीन इस्तेमाल करने में ज्यादा प्रीमियम साबित होती है।

2. मोबाइल कनेक्टिविटी: रैपिड में केवल एक यूएसबी चार्जर दिया गया है और वो भी ग्लवबॉक्स के अंदर। इसका मतलब ये हुआ कि मोबाइल को चार्ज करने के लिए आपको अपना फोन ग्लवबॉक्स में रखना होगा। वहीं ब्लूटूथ के जरिए कॉन्टेक्ट सिंक नहीं होने के चलते आपको ये पता ही नहीं चलेगा कि आपको कौन कॉल कर रहा है। ऐसे में आपको एक 12 वोल्ट के अडेप्टर को खरीदने की जरूरत पड़ती है जिसे सेंटर कंसोल पर प्लग इन किया जा सकता है। 

3. स्टाइलिंग: इसमें कोई श​क नहीं कि रैपिड दिखने मे काफी आकर्षक है। इसका डिजाइन कभी आउटडेटेड नहीं हो सकता है। हालांकि, कई मॉडर्न कारों के आगे अब इसका डिजाइन थोड़ा ​फीका पड़ने लगा है। यहां तक कि अब फोक्सवैगन वेंटो तक में एलईडी हेडलैंप्स का फीचर दिया जाने लग गया है जो रैपिड में मौजूद नहीं है। 

निष्कर्ष

स्कोडा रैपिड में नए पावरट्रेंस ऑप्शन मिल जाने से ये फिर से एक बेहतर स्पोर्टी कार बन गई है। ये काफी तेज कार है और इसका इंजन भी काफी रिफाइंड है और सिटी में भी ये अपना स्पोर्टी कैरेक्टर शो करती है। हालांकि इसका ट्रांसमिशन काफी जल्दबाजी दिखाने की कोशिश करता है और इंजन से पावर लेने में कोई कमी नहीं छोड़ता है। ऐसे में ये कार सिटी में भी काफी तेज लगती है।

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इसके ऑटोमैटिक वेरिएंट के लिए एक्सट्रा 1.5 लाख रुपये खर्च करना तभी सार्थक है जब आप खुद स्पोर्टी ड्राइविंग के शौकीन हो। ऐसे लोगों को इसके अपशिफ्ट्स और डाउनशिफ्ट्स काफी पसंद आएंगे। मगर आप सिटी में आराम आराम से कार चलाना पसंद करते हैं तो फिर स्कोडा रैपिड का मैनुअल वेरिएंट ही खरीदें।

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