कोरोनाकाल में महाराष्ट्र से कार ड्राइव करते हुए राजस्थान आए हमारे स्टाफ राइटर की कहानी उन्हीं की जुबानी
प्रकाशित: मई 26, 2020 02:18 pm । nabeel
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कोरोनाकाल के बीच अब सरकार द्वारा आमजन को काफी रियायतें दे दी गई है। अब आप जरूरी काम से अपना वाहन लेकर सड़क पर निकल सकते हैं, मगर आपको अब पहले से ज्यादा सावधान और सतर्क रहना होगा। वहीं यदि आप एक लंबी दूरी की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं तो आपको स्थानीय प्रशासन द्वारा लगाई गई कुछ पाबंदियों और लॉकडाउन के प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखना होगा। हम यहां रियल एक्सपीरियंस पर बेस्ड उन 7 प्रमुख बातों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें जानकर आपको एक राज्य से दूसरे राज्य में अपने निजी वाहन से यात्रा करने में मदद मिलेगी।
1. वैध ट्रैवल पास के लिए करें अप्लाय
आप जिस राज्य में यात्रा कर रहे हैं, उस राज्य में प्रवेश करने के लिए आपको ट्रैवल पास लेना अनिवार्य है, हालांकि, यदि आप किसी राज्य से गुजर रहे हैं तो उसके लिए ट्रैवल पास जरूरी नहीं है। उदाहरण के तौर पर यदि आप महाराष्ट्र से राजस्थान आ रहे हैं जिसके लिए आपको गुजरात से होकर गुजरना पड़ता है तो उस स्थिति में आपको केवल राजस्थान के लिए ट्रैवल पास लेना होगा, ना कि गुजरात के लिए। बता दें कि महाराष्ट्र में आप केवल जरूरी काम के लिए वाहन लेकर एक शहर से दूसरे शहर जा सकते हैं। ऐसे में आपको वहां इंट्रा स्टेट ट्रैवल पास की भी जरूरत पड़ेगी। मैंने पुणे पुलिस के वेब पोर्टल के ज़रिए इसके लिए अप्लाय किया था।
राजस्थान में पास के लिए आपको ज्यादा कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ती है। इसमें केवल आपके वाहन में यात्रा कर रहे यात्रियों की संख्या, आधार कार्ड की जानकारी, इमरजैंसी टाइप और कहां से कहां की ओर जा रहे हैं, आदि जानकारी देनी पड़ती है। सबसे अच्छी बात ये है कि यहां पास के लिए अप्लाय करने की पूरी प्रक्रिया आसान है और जल्दी पूरी हो जाती है। मैंने सुबह 10 बजे पास के लिए अप्लाय किया और करीब सवा 11 बजे मुझे पास मिल भी गया। हालांकि, पुणे में मुझे पास मिलने में काफी समय लगा। आवेदन करने का प्रोसेस भी काफी मुश्किल था, जिसमें मेरा मेडिकल सर्टिफिकेट, मेरी फोटो, यात्रा की तारीख, उद्देश्य आदि मांगे गए।
जहां तक मैं समझ पाया कि इमरजैंसी को लेकर हर राज्य सरकार के अपने दिशा-निर्देश हैं और आपकी ट्रैवल रिक्वैस्ट पर अप्रूवल मिलना इस बात पर निर्भर करता है कि आपके सामने किस टाइप की इमरजैंसी है।
पास आवेदन करने के लिए बस अपनी राज्य सरकार या पुलिस की वेबसाइट का लिंक देखें। कम से कम 3 दिन पहले ही पास के लिए अप्लाय करें। सर्च इंजन गूगल पर एक आसान कीवर्ड सर्च आपको सीधे उस लिंक पर रिडायरेक्ट कर देगा।
2. ट्रैवल पास का कैसे करें इस्तेमाल
ई-एनओसी के रूप में मिलने वाले इस पास के जरिए आप अपने द्वारा बताए गए स्थान तक आपके ही द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर यात्रा कर सकते हैं।
एक बार जब आप ट्रैवल पास प्राप्त कर लेते हैं तो उसका प्रिंटआउट लेना ना भुलें और इसे विंडस्क्रीन के ऊपर बाएं कोने में चिपका दें। राजस्थान में जो आपको पास मिलता है उसमें क्यूआर कोड भी होता है जिससे चीज़ें और भी आसान हो जाती है। प्रिंट आउट को विंडस्क्रीन पर चिपकाने से स्टेट बॉर्डर पर चैकिंग करने वाले अधिकारियों को आसानी रहती है और दूरियां भी बनी रहती है जो इस कोरोनाकाल में अति आवश्यक है। इसी के साथ क्यूआर कोड स्कैन करने से उन्हें ये मालूम चल जाता है कि आपका पास वैलिड है कि नहीं।
3. ड्राइव करते वक्त इन बातों का रखे ख्याल
चूंकि ड्राइव करते वक्त कई बार आपको गाड़ी से उतरने की जरूरत पड़ेगी और ऐसा क्यों ये मैं आपसे आगे शेयर करूंगा। बहरहाल इस दौरान आप मास्क, सैनिटाइजर और हाथ धोने के पानी के साथ हैंडवॉश रखना ना भूलें। सुनिश्चित करें कि आपके पास ट्रैवल परमिट और आपके आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस के अलग-अलग प्रिंटआउट हों। इससे प्रक्रिया आसान बन जाती है और रास्ते में चैकिंग के दौरान आपके ओरिजनल दस्तावेज को भी कोई हाथ नहीं लगाता।
4. आपके निर्धारित रूट का मैप जरूर देख लें
आजकल जब भी हम कहीं जाते हैं और किसी कंटेमिनेशन जोन से बचने के लिए गूगल मैप्स पर कुछ ज्यादा ही भरोसा करने लगे हैं। इन जोन का डेटा सरकारी पोर्टल पर रहता है। इसके अलावा ये और बता दूं कि आप अपने रूट में रुकने के लिए पहले से ही स्थान तय कर लें, क्योंकि अभी तक हाईवे किनारे आने वाले रेस्टोरेंट और ढाबे पूरी तरह से शुरू नहीं हुए हैं। वैसे आप ऐसी जगहों पर कुछ खाने से थोड़ा परहेज ही रखें तो बेहतर होगा। रास्ते में मैनें केवल मैक्डॉनल्ड्स के ड्राइव थ्रु का ही सहारा लिया जो कि अब सभी जगह शुरू हो चुके हैं।
शहरों में पेट्रोल पंप सुबह 7 बजे से लेकर शाम के 7 बजे तक चालू रहते हैं तो वहीं हाईवे पर 24 घंटे पेट्रोल डीजल मिल रहे हैं।
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5. बॉर्डर क्रॉसिंग
हर शहर और राज्य के एंट्री पॉइन्ट्स पर बैरिकेडिंग की गई है। सिटी बॉर्डर पर तो पुलिस आपका पास देखकर आपको जाने देती है। यहां ज्यादा ट्रैफिक नहीं होने के कारण बैरिकेड्स 2 से 5 मिनट में पार हो जाते हैं । गुजरात और राजस्थान में आपको एंट्री फॉर्म भरने के लिए कार से बाहर निकलना पड़ता है और वहां राज्य सरकार का एक कर्मचारी आपका एंट्री फॉर्म भरता है जिसके लिए आपको उसकी मदद करनी होती है। इस दौरान इसमें आपका नाम, पिता का नाम, वाहन का विवरण, यात्री विवरण और आपके गंतव्य जैसे चीजों का विवरण देना होता है। आपके आगे खड़े वाहनों के आधार पर आपको करीब 10 मिनट तो कम से कम रूके रहना पड़ता है। जब मैं यात्रा कर रहा था तो मेरे आगे 5 वाहन पहले से ही खड़े थे।
दूसरी तरफ स्टेट बॉर्डर पर वाहनों की थोड़ी लंबी कतार लगती है। स्टेट बॉर्डर से गुजरते वक्त आपको मेडिकल चैकअप कराने की कोई जरूरत नहीं रहती है। गुजरात में मेरा राजस्थान का ट्रैवल पास देखा गया और उसकी जानकारी वहां दर्ज की गई। इसके बाद वहां एक ट्रैवल फॉर्म भरवाया गया, जिसके बाद मुझे आगे जाने दिया। राजस्थान में प्रवेश करने की प्रक्रिया थोड़ी लंबी रही। सबसे पहले मेरी परमिट चैक की गई, इसके बाद थर्मल गन के जरिए मेरी बॉडी का टैंपरेचर चैक किया गया। इन सबके बाद मुझसे एक ट्रैवल फॉर्म भरवाया गया और अंत में मेरे बाएं हाथ की कलाई पर 2 सप्ताह का होम क्वैरेंटाइन स्टैम्प लगा दिया गया था।
6. ट्रैफिक और टोल नाको की ये है स्थिति
देशभर में टोल नाके शुरू हो चुके हैं और फास्टैग का इस्तेमाल करने के लिए ज्यादा जोर दिया जा रहा है। महाराष्ट्र और गुजरात में टोल नाकों पर 4 से 5 लेन होती है और सभी ऑपरेशनल भी है। गुजरात में कई जगहों पर प्राइवेट कारों से टोल नहीं वसूला जाता है और जहां वसूला जाता है वहां ज्यादा भीड़ नहीं रहती है।
गुजरात में 20 से 30 प्रतिशत भारी वाहन ही देखने को मिले और वहां ट्रैफिक भी काफी कम था। हां, मगर राजस्थान और महाराष्ट्र में हाईवे पर 40 से 50 प्रतिशत ट्रैफिक था।
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7. ऐसा रहा मेरा पूरा सफर
मैंने 18 मई को अपनी यात्रा प्रारंभ की और इस दौरान 18 घंटे में 1260 किलोमीटर का सफर तय किया।
अपनी यात्रा के एक दिन बाद मुझे राजस्थान सरकार से मेरी यात्रा के बारे में पूछताछ करने के लिए एक फोन आया और उन्होनें मुझसे मेरी कुशलक्षेम पूछी। फिलहाल मैं 2 सप्ताह के लिए होम क्वारैंटाइन हूं और वर्क फ्रॉम होम कर रहा हूं।
उम्मीद करता हूं कि आप भी अपने-अपने घरों को सुरक्षित पहुंच गए होंगे। ऐसे में आप लॉकडाउन के बीच की गई अपनी यात्राओं से जुड़े एक्सपीरियंस के बारे में कमेंट बॉक्स में जरूर शेयर करें ।