भारत में सेमी कंडक्टर्स और इलेक्ट्रिानिक कंपोनेंट्स के प्रोडक्शन के लिए सरकार ने 2.3 लाख करोड़ रुपये का बजट किया तय

प्रकाशित: दिसंबर 16, 2021 07:33 pm । भानु

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भारत सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए लिए 2.3 लाख करोड़ रुपये (30 बिलियन अमरीकी डालर) का बजट तय किया है। बता दें कि पूरी दुनिया में इस समय सेमी कंडक्टर चिप्स की शॉर्टेज चल रही है जिससे कारों का प्रोडक्शन धीमा हो चला है। इसके साथ ही स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे इले​क्ट्रॉनिक आइटम्स के प्रोडक्शन पर भी सेमी कंडक्टर चिप्स की शॉर्टेज का सामना करना पड़ रहा है। 

2.3 लाख करोड़ में से 76000 करोड़ रुपये सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले के प्रोडक्शन में खर्च किए जाएंगे। इस राशि से इलेक्ट्रिक कंपोनेंट्स,सब असेंबली और फिनिश्डि गुड्स जैसे सप्लाय चेन पार्ट्स तैयार करने पर खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए पीएलआई (प्रोडक्शन से जुड़े इंसेटिव्स), आईटी हार्डवेयर के लिए पीएलआई, स्पेशल स्कीम्स और मॉडिफाइड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी 2.0) योजना के लिए 55,392 करोड़ रुपये (7.5 बिलियन अमरीकी डालर) अलग रखे गए हैं। साथ ही एसीसी बैटरी, ऑटो कंपोनेंट्स, टेलीकॉम और नेटवर्किंग प्रोडक्ट्स, सोलर पीवी मॉड्यूल और व्हाइट गुड्स सहित अलाइड सेक्टर्स के लिए 98,000 करोड़ रुपये (13 बिलियन अमरीकी डालर) के पीएलआई को अलग रखा गया है।

अभी सेमी कंडक्टर्स के लिए भारत विदेशों पर निर्भर है। एक बार जैसे ही भारत में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स शुरू हो जाते हैं तो फिर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की इनपुट कॉस्ट कम हो जाएगी। इस पहल से देश में रोजगार भी उत्पन्न होगा। सेमीकंडक्टर्स, डिस्प्ले और बैटरी कुछ ऐसी चीजें हैं जिनपर सरकार इंसेटिव्स देने को तैयार है, और इससे भारत में ऑटो उद्योग को भारी बढ़ावा मिलेगा। अगर चीजें योजना के अनुसार होती हैं, तो यह प्रोत्साहन पैकेज भारत में भी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अच्छा खासा बढ़ावा दे सकता है। 

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