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फोर्ड इकोस्पोर्ट डीजल 6000 किलोमीटर लॉन्ग टर्म रिव्यू : हाईवे रन

Published On सितंबर 22, 2020 By भानु for फोर्ड इकोस्पोर्ट

अनलॉक के बाद हम फोर्ड इकोस्पोर्ट को लेकर पुणे से जयपुर के लंबे सफर पर निकले, इस कार को चलाने का कैसा रहा हमारा एक्सपीरियंस जानिए इस 6000 किलोमीटर के लॉन्ग टर्म रन में:- 

बूट स्पेस

क्यूंकि काफी लंबा सफर तय करना था इसलिए हमारे पास सामान भी ज्यादा था। वैसे तो हम इको स्पोर्ट कार के बूटस्पेस के बारे में आपको पहले भी बता चुके हैं। इसमें एक बड़ा सूटकेस और दूसरे छोटे बैग आराम से रखे जा सकते हैं। मगर इसमें एक और बड़ा बैग रखने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। 

केबिन एक्सपीरियंस 

इसके केबिन में बड़े डोर पॉकेट्स दिए गए हैं जिनमें 1 लीटर तक की बोतल के साथ कुछ छोटी बोतलें आराम से रखी जा सकती है। वहीं इसमें दो कपहोल्डर भी दिए गए हैं। हालांकि कार को ड्राइव करते वक्त फोन रखने के लिए हमें कोई जगह दिखाई नहीं दी, ऐसे में हमने उसे को पैसेंजर सीट पर ही रख दिया। हालांकि, इस काम के लिए इसमें ग्लवबॉक्स भी दिया गया है। इसके अलावा सेंटर आर्मरेस्ट के अंदर भी काफी गहरा स्टोरेज स्पेस दिया गया है जहां मोबाइल का चार्जर या दूसरे छोटे मोटे आईटम रखे जा सकते हैं। हमें इसमें एक टिकट होल्डर की काफी कमी महसूस हुई क्योंकि रास्ते में हम कई टोल नाकों से गुजरे और उस दौरान हमें आर्मरेस्ट के अंदर ही पर्ची को रखना पड़ा। 

इस कार के केबिन में काफी वाइब्रेशंस भी महसूस हुई। हार्ड एक्सलरेशन के दौरान इसके डैशबोर्ड का कवर काफी वाइब्रेट होता है, वहीं स्पीड ब्रेकर से कार के गुजरने पर सीट​बेल्ट की क्लिप से भी आवाज आती है। 

फोर्ड इकोस्पोर्ट के अपडेटेड मॉडल में दी गई नई एमआईडी स्क्रीन काफी यूज़र फ्रेंडली है। इसमें डिस्प्ले को अपने हिसाब से कस्टमाइज़ करने की सुविधा दी गई है, वहीं स्टीयरिंग पर लगे बटन से इंफॉर्मेशन को स्क्रॉल भी किया जा सकता है। इसके रीडआउट्स भी काफी ब्राइट हैं। हमने एमआईडी डिस्प्ले को फ्यूल एफिशिएंसी,ट्रिप,इंस्टेंटेनियस एफिशिएंसी और टैंक रेंज देखने के हिसाब से सैट किया था। 

सिटी के मुकाबले हाईवे पर चलाने के हिसाब से फोर्ड इकोस्पोर्ट एक अच्छी कार साबित होती है। 2500 आरपीएम पर इंजन काफी दमदार लगता है जो कि पांचवे गियर पर 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर कार को खींचने का दम रखता है। सबसे अच्छी बात तो ये है कि आप काफी समय इसी आरपीएम लेवल पर कार को चला सकते हैं। हाईवे पर ये भारी वाहनों को काफी आराम से ओवरटेक कर लेती है। 

ये इतनी तेजी से स्पीड पकड़ती है कि कभी कभी आपको थ्रॉटल डाउन करना पड़ता है। 

सस्पेंशन

100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार को पार कर लेने के बाद इकोस्पोर्ट के सस्पेंशन खराब रास्तों और उनसे आने वाले झटकों को आराम से झेल लेते हैं और उसके बाद जल्दी से सैटल भी हो जाते हैं। 

हालांकि किसी उबड़ खाबड़ रास्ते पर आपको गाड़ी धीरे करनी पड़ती ही है। वहीं कुछ शार्प स्पीडब्रेकर्स पर से गुजरने के बाद ऐसा झटका लगता है जैसे किसी ने ​विशालकाय हथोड़े से वार किया हो। हालांकि कार में जब ज्यादा पैसेंजर्स सवार हो तो ऐसा कभी कभी ही महसूस होता है। 

इकोस्पोर्ट के मार्केट में बने रहने का कारण

इकोस्पोर्ट की सबसे अच्छी बात इसकी हैंडलिंग है। इसलिए ये एसयूवी सेगमेंट में अपने से नई कारों को भी कड़ी से कड़ी टक्कर दे रही है। हाइवे पर ये कार कमाल की लगती है। जब बात शार्प टर्न की आती है तो इकोस्पोर्ट पर आंख बंद करके विश्वास किया जा सकता है। 

इसमें ब्रिजस्टोन इकोपिया टायर दिए गए हैं जिसकी शानदार ग्रिपिंग का अहसास आपको स्टीयरिंग हाथ में लेने के बाद ही पता चल जाता है यानी ड्राइव करते वक्त। जैसे ही हमने राजस्थान की बॉर्डर पर एक सिक्स लेन हाइवे में एंट्री ली जहां ट्रैफिक काफी कम था, वहां हमें किसी स्पोर्ट्स कार दौड़ाने जैसा अहसास हुआ। यहां ना तो कोई स्पीड ब्रेकर था ना कोई खराब सड़क, बस फिर क्या था सीधी सपाट सड़क पर फोर्ड इकोस्पोर्ट अपना कमाल दिखाती चली गई। 

अब बात माइलेज की

1300 किलोमीटर के इस लंबे सफर पर निकलने से पहले हमने इसका टैंक फुल करवाया था और लगभग 750 किलोमीटर कवर करने के बाद एक बार फिर से इसे फुल कराना पड़ा। मंजिल पर पहुंचने के बाद इसमेंएक चौथाई फ्यूल बचा हुआ था। ऐसे में कुल मिलाकर यदि एक सटीक आंकड़े की बात करें तो इसने पूरे सफर में हमें 18 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज दिया। वहीं वापस लौटते समय थोड़ी स्पोर्टी ड्राइविंग करने के कारण माइलेज गिरकर 16 किलोमीटर प्रति लीटर का हो गया। इसका कारण ज्यादा एक्सलरेशन और ज्यादा स्पीड रहे। यहां तक कि 110 किलोमीटर प्रति लीटर की रफ्तार पर चलने के दौरान तो इसकी एफिशिएंसी में कोई बदलाव नहीं आया, मगर इसके बाद इसकी एफिशिएंसी में गिरावट देखने को मिली। मगर कुल मिलाकर हमें इस फ्यूल एफिशिएंसी के साथ घर लौटने का कोई दुख नहीं था। 

तो क्या लेनी चाहिए इकोस्पोर्ट?

इसमें कोई शक नहीं कि इकोस्पोर्ट के साथ इस लंबे सफर में हमें मजा आया। भले ही हुंडई वेन्यू में हमें कंफर्ट और एक्सयूवी300 में सेफ्टी मिल सकती थी। वहीं नेक्सन से हमें अच्छा माइलेज हासिल हो सकता था। मगर, जो एक्सपीरियंस फोर्ड इकोस्पोर्ट से मिला उसकी एक अलग ही बात थी। तो कुल मिलाकर हम अपने किसी अगले ट्रिप पर इकोस्पोर्ट से ही जाना पसंद करेंगे। बता दें कि फोर्ड ने हमें रोड टेस्ट के लिए ये कटलेट मॉडल दिया था। इसकी पूरी डीटेल नीचे दी गई है। 

  • 20 नवंबर 2019 को ये कार टेस्टिंग के लिए मिली

  • टेस्टिंग के लिए सौंपे जाने से पहले तक 9300 किलोमीटर चल चुकी थी

  • अब तक 15,244 किलोमीटर चल चुकी

  • फ्यूल एफिशिएंसी: 17 किलोमीटर प्रति लीटर

  • खूबियां: पंची मिड रेंज,इंगेजिंग हेंडलिंग,​अच्छी टायर ग्रिप

  • कमियां: वाइब्रेशन,छोटे मोटे स्टोरेज की कमी,हार्श राइड क्वालिटी

सा​थ ही पढ़ें: फोर्ड इकोस्पोर्ट 3000 किलोमीटर रिव्यू: सर्विस कॉस्ट

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